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तीसरे विश्व युद्ध(World War III) की धमकी? Trump की चेतावनी और NATO का रूस पर बड़ा आरोप!

By Admin@2001

Published on: December 21, 2025

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World War III: वैश्विक तनाव के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘तीसरे विश्व युद्ध’ की आहट से दुनिया को आगाह किया है। वहीं, नाटो (NATO) ने रूस पर भविष्य में हमले का गंभीर आरोप लगाते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। क्या हम एक महायुद्ध की ओर बढ़ रहे हैं? जानिए इस भू-राजनीतिक संकट के पीछे की पूरी कहानी।

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप(Donald Trump) द्वारा ‘तीसरे विश्व युद्ध’ (World War III) को लेकर दी गई चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है। एक तरफ जहाँ ट्रंप रूस-यूक्रेन संघर्ष को मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बता रहे हैं, वहीं उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) ने यह दावा कर सनसनी फैला दी है कि रूस अब सीधे तौर पर नाटो सदस्य देशों को अपने अगले निशाने के रूप में देख रहा है। यह लेख इस जटिल भू-राजनीतिक स्थिति के हर पहलू का गहराई से विश्लेषण करता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपनी हालिया रैलियों और व्हाइट हाउस के प्रेस बयानों में बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के सबसे करीब है। ट्रंप का तर्क है कि वर्तमान वैश्विक नेतृत्व, विशेष रूप से यूरोप और अमेरिका के पिछले प्रशासनों की नीतियां, रूस को एक ऐसे कोने में धकेल रही हैं जहाँ से परमाणु युद्ध की वापसी का कोई रास्ता नहीं बचेगा।

Trump ने स्पष्ट रूप से कहा है, “हम एक ऐसे युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं जो मानव इतिहास के सभी युद्धों से अधिक विनाशकारी होगा। यह केवल गोलियों और टैंकों का युद्ध नहीं होगा, बल्कि यह परमाणु संहार (Nuclear Annihilation) का कारण बनेगा।” ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यूक्रेन को असीमित सैन्य सहायता और रूस के भीतर तक मार करने वाली मिसाइलों की अनुमति देने से व्लादिमीर पुतिन को सीधे नाटो पर हमला करने का बहाना मिल रहा है।

ट्रंप की चेतावनियों के बीच, नाटो(NATO) के महासचिव मार्क रट ने एक डरावनी तस्वीर पेश की है। नाटो की खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने अपनी पूरी अर्थव्यवस्था को ‘वॉर मोड’ में बदल दिया है। इसका मतलब है कि रूस अब केवल यूक्रेन में अपनी जीत नहीं चाहता, बल्कि वह अपनी सीमाओं को सोवियत युग की तरह विस्तार देने की योजना बना रहा है।

नाटो (NATO) का कहना है कि पोलैंड, लातविया, लिथुआनिया और एस्टोनिया जैसे देश रूस के ‘हाइब्रिड युद्ध’ का शिकार हो रहे हैं। इन देशों के हवाई क्षेत्र में रूसी ड्रोन का घुसना, साइबर बुनियादी ढांचे पर हमले और बाल्टिक सागर में पानी के नीचे की केबलों के साथ छेड़छाड़ इस बात का संकेत है कि रूस सीधे टकराव की तैयारी कर रहा है। नाटो के अनुसार, यदि यूक्रेन गिरता है, तो पुतिन का अगला कदम नाटो के ‘आर्टिकल 5’ (सामूहिक रक्षा) की परीक्षा लेना होगा।

तनाव बढ़ने का एक बड़ा कारण रूस द्वारा अपनी नई बैलिस्टिक मिसाइल ‘ओरेश्निक’ (Oreshnik) का सफल परीक्षण और तैनाती है। राष्ट्रपति पुतिन ने गर्व से घोषणा की है कि इस मिसाइल की गति 10 माक (ध्वनि की गति से 10 गुना तेज) है और दुनिया की कोई भी वर्तमान रक्षा प्रणाली (जैसे अमेरिका की पैट्रियट) इसे रोकने में सक्षम नहीं है।

इसके साथ ही, रूस ने अपने परमाणु सिद्धांत (Nuclear Doctrine) में बदलाव किया है। नए नियमों के अनुसार, यदि कोई गैर-परमाणु संपन्न देश (जैसे यूक्रेन) किसी परमाणु शक्ति (जैसे अमेरिका या ब्रिटेन) की मदद से रूस पर हमला करता है, तो रूस इसे एक संयुक्त हमला मानेगा और परमाणु हथियारों से जवाब देने का अधिकार रखेगा। यह बदलाव सीधे तौर पर तीसरे विश्व युद्ध की नींव रखने जैसा है।

युद्ध होने पर प्रभाव

यदि वर्तमान संघर्ष तीसरे विश्व युद्ध (World War III) का रूप लेता है, तो इसका विनाशकारी प्रभाव भौगोलिक सीमाओं को लांघकर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को तहस-नहस कर देगा। रूस, जो वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है, यदि सीधे युद्ध में शामिल होता है तो तेल और गैस की कीमतों में होने वाला बेतहाशा उछाल पूरी दुनिया को एक गहरी आर्थिक मंदी में धकेल देगा। इसके साथ ही, काला सागर (Black Sea) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग के बाधित होने से गेहूं और उर्वरकों की वैश्विक सप्लाई चेन टूट जाएगी, जिससे विशेष रूप से अफ्रीका और एशिया के विकासशील देशों में अकाल और भुखमरी का संकट पैदा हो सकता है।

इतना ही नहीं, यह युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित न रहकर अंतरिक्ष तक फैल जाएगा; यदि उपग्रहों (Satellites) को निशाना बनाया गया, तो वैश्विक इंटरनेट, जीपीएस और बैंकिंग संचार तंत्र पूरी तरह ठप हो सकते हैं, जिससे आधुनिक जीवन की धड़कन रुक जाएगी।

“तीसरा विश्व युद्ध(World War III)’ अब केवल फिल्मों या इतिहास की किताबों की कल्पना नहीं रह गया है। ट्रंप की चेतावनी और नाटो की तैयारी इस बात का प्रमाण है कि दुनिया एक अत्यंत खतरनाक दौर से गुजर रही है। 2014 से शुरू हुआ यह विवाद अब 2025 में अपने निर्णायक और सबसे डरावने मोड़ पर है। यदि कूटनीति और बातचीत के रास्ते बंद होते हैं, तो आने वाली पीढ़ियां इस दौर को ‘मानवता की सबसे बड़ी चूक’ के रूप में याद करेंगी।

आज ज़रूरत इस बात की है कि वैश्विक महाशक्तियाँ अपने अहंकार को छोड़कर मेज पर बैठें, क्योंकि जैसा कि अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था— “मैं नहीं जानता कि तीसरा विश्व युद्ध (World War III) किन हथियारों से लड़ा जाएगा, लेकिन चौथा विश्व युद्ध पत्थरों और लाठियों से लड़ा जाएगा।”

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