देहरादून: भारत में अमीरों का पलायन अब केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि देश के भविष्य के लिए एक चिंताजनक संकेत बन चुका है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अकेले पिछले वर्ष में 3,500 से अधिक करोड़पतियों (Millionaires) ने भारत छोड़ दिया है, जो दुबई, लंदन और सिंगापुर जैसे वैश्विक शहरों को अपना नया घर बना रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह पलायन केवल धनवानों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की ‘एलीट क्लास’ और हाई-प्रोफाइल हस्तियां भी इस लिस्ट में शामिल हैं। चाहे वह विराट कोहली का अपना गुरुग्राम वाला घर बेचकर लंदन में समय बिताना हो, प्रियंका चोपड़ा का हॉलीवुड में स्थायी होना, या अक्षय कुमार की कनाडाई नागरिकता का लंबे समय तक बने रहना—इन बड़े नामों का जाना केवल एक व्यक्तिगत निर्णय (Personal Choice) नहीं है। यह भारत की उन गहरी बुनियादी समस्याओं—जैसे उच्च टैक्स, प्रदूषण, और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर—की ओर इशारा करता है, जिनसे आज आम मध्यम वर्गीय नागरिक भी जूझ रहा है।
इतने अमीर लोग क्यों भाग रहे हैं?
भारत के अमीरों और बड़े सितारों जैसे विराट कोहली और प्रियंका चोपड़ा का विदेश में बसना केवल एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि ‘जीवन की गुणवत्ता’ (Quality of Life) और ‘आर्थिक सुरक्षा’ से जुड़ा एक सोचा-समझा फैसला है। 2025 की रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं: पहला, प्राइवेसी और शांति—भारत में सेलिब्रिटी स्टेटस के कारण विराट कोहली जैसे सितारे बिना भीड़ के सड़क पर नहीं चल सकते, जबकि लंदन या न्यूयॉर्क में उन्हें एक सामान्य नागरिक की तरह जीने की आजादी मिलती है। दूसरा, बेहतर बुनियादी सुविधाएं—भारी टैक्स चुकाने के बावजूद भारत के बड़े शहरों में प्रदूषण, ट्रैफिक और खराब हेल्थकेयर जैसी समस्याएं बनी हुई हैं, जिनसे बचने के लिए अमीर वर्ग यूरोप या दुबई का रुख कर रहा है। तीसरा, टैक्स और बिजनेस फ्रेंडली नीतियां—दुबई और सिंगापुर जैसे देश ‘जीरो’ या बेहद कम इनकम टैक्स के साथ बेहतर बिजनेस अवसर प्रदान करते हैं। इसके अलावा, अपने बच्चों के लिए विश्व स्तरीय शिक्षा और बेहतर पासपोर्ट (Passport Power) की चाहत भी इन हस्तियों को विदेश में स्थायी ठिकाना बनाने के लिए प्रेरित करती है।
मध्यम वर्ग के लोगों पर प्रभाव
अमीरों का यह पलायन भारत की अर्थव्यवस्था के लिए केवल एक वित्तीय क्षति नहीं, बल्कि देश के इन्वेस्टमेंट और रोजगार के अवसरों का भी विनाश है। जब एक सफल उद्यमी या निवेशक देश छोड़ता है, तो उसके साथ वे भविष्य की संभावनाएँ भी चली जाती हैं जो हज़ारों भारतीयों को रोजगार दे सकती थीं। इसका सबसे बड़ा और सीधा असर देश के मध्यम वर्ग (Middle Class) पर पड़ता है। सरकार को देश की विशाल बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए राजस्व की आवश्यकता होती है, और जब अमीरों के जाने से ‘टैक्स बेस’ सिकुड़ता है, तो बचा हुआ सारा वित्तीय बोझ उन 2-3% ईमानदार करदाताओं पर आ जाता है जो पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे हैं। विडंबना यह है कि लाखों रुपये डायरेक्ट टैक्स और GST के रूप में देने के बावजूद, इस वर्ग को कोई ‘सोशल सेफ्टी नेट’ या सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती। सिद्धू मूसेवाला जैसी हस्तियों की हत्या या प्रभावशाली लोगों के घरों पर हमले यह डर पैदा करते हैं कि यहाँ जीवन और संपत्ति की कोई पुख्ता सुरक्षा नहीं है, जो अंततः टैलेंट ड्रेन को और तेज करता है।
क्या होगा अगर अमीर ऐसे ही देश छोड़ते रहें?
अगर अमीर और प्रभावशाली लोग इसी तरह देश छोड़ते रहे, तो भारत के $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनने के सपने को गहरा धक्का लग सकता है। अमीरों का पलायन अपने साथ केवल पैसा नहीं, बल्कि ‘इकोनॉमिक ग्रोथ’ का इंजन भी ले जाता है। इसका सबसे पहला असर पूंजी की कमी (Capital Flight) के रूप में दिखेगा, जिससे नए उद्योगों और स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग जुटाना मुश्किल हो जाएगा। [Image showing the ‘Wealth Drain’ cycle and its negative impact on national GDP growth] दूसरा बड़ा खतरा ‘जॉब क्राइसिस’ का है; क्योंकि जब बड़े निवेशक और बिजनेस मैन देश छोड़ते हैं, तो वे अपने साथ हजारों भविष्य की नौकरियां भी ले जाते हैं। इसके अलावा, टैक्स का पूरा बोझ देश के बचे हुए मध्यम वर्ग पर आ जाएगा, जिससे समाज में आर्थिक असमानता और असंतोष बढ़ेगा। यदि यह ‘ब्रेन और वेल्थ ड्रेन’ नहीं रुका, तो भारत केवल एक ‘उपभोक्ता बाजार’ बनकर रह जाएगा, जबकि सारा नवाचार (Innovation) और बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) विदेशों के नाम होगी।
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