देहरादून: Uttarakhand में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का गुस्सा अब सड़कों पर खुलकर सामने आ रहा है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आई हजारों की संख्या में आंगनवाड़ी वर्कर्स ने अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर देहरादून में मोर्चा खोल दिया है। उनकी साफ चेतावनी है: अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे भूख हड़ताल करने से भी पीछे नहीं हटेंगी।
9000 में गुज़ारा नहीं, रोज़ कमाने वाले से भी कम सैलरी!
आंदोलन कर रही महिलाओं का कहना है कि उनकी वर्तमान सैलरी 9,000 रुपये के आसपास है, जो इस महंगाई के दौर में उनके और उनके परिवार के लिए मूलभूत ज़रूरतें पूरी करने के लिए भी काफी नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया है कि जो दिहाड़ी मजदूर (Daily Wage Worker) होते हैं, उन्हें भी कई बार उनसे ज़्यादा मजदूरी मिल जाती है, जबकि वे शिक्षा, पोषण, टीकाकरण जैसे महत्वपूर्ण सरकारी काम ज़मीन पर उतारती हैं।
एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने कहा, “हमारा काम सिर्फ बच्चों को खिलाना नहीं है। हम टीकाकरण से लेकर सरकारी योजनाओं को घर-घर पहुँचाती हैं। हम कम पढ़ी-लिखी नहीं हैं, कई बहनें ग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट हैं। लेकिन क्या इस मानदेय (Honorarium) में कोई सम्मान है?”
‘1600 की बढ़ोतरी मज़ाक है!’
विरोध प्रदर्शन के बीच, सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 1600 रुपये तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार करने की घोषणा की है। यह खबर 2021 के बाद पहली वृद्धि होगी।
लेकिन प्रदर्शनकारी महिलाएं इस मामूली बढ़ोतरी से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं।
एक प्रदर्शनकारी ने गुस्से में कहा, “यह सिर्फ़ एक आश्वासन है, कोई लिखित शासनादेश नहीं। और 1600 रुपये? 15-20 साल की सेवा के बाद 1600 रुपये की बढ़ोतरी क्या होती है? यह हमारे साथ मज़ाक है! आज की महंगाई में यह पैसा कहाँ जाएगा?”
उनकी मुख्य मांग है कि उनका मानदेय (सैलरी) ₹9,300 से बढ़ाकर कम से कम ₹24,000 प्रति माह किया जाए, या फिर उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
‘कांग्रेस से उकसाहट नहीं, ये हमारी ज़रूरत है’
प्रदर्शनकारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने साफ किया है कि उनके इस आंदोलन के पीछे किसी राजनीतिक दल, जैसे कांग्रेस, का कोई हाथ नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी मांगें पूरी तरह से उनकी व्यक्तिगत ज़रूरत से जुड़ी हैं।
एक महिला नेता ने कहा, “कुछ लोग कह रहे हैं कि हमें विपक्ष भड़का रहा है। लेकिन हम सब अपनी मर्ज़ी से आए हैं। हमें अपना घर चलाना है, बच्चों की फीस देनी है। जब ₹9000 में गुज़ारा नहीं होता, तो हमें सड़कों पर आना ही पड़ेगा। इसमें राजनीति कहाँ से आ गई?”
बीजेपी और धामी सरकार पर सीधा हमला
आंदोलनकारी महिलाओं ने सीधे तौर पर केंद्र की मोदी सरकार और उत्तराखंड की धामी सरकार पर निशाना साधा है।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी जी हमेशा महिला सशक्तिकरण और नारी सम्मान की बात करते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि आज लाखों महिलाएं जो सरकारी योजनाओं का आधार हैं, उन्हें अपने हक़ के लिए इस ठंड में धरने पर बैठना पड़ रहा है। हम उम्मीद करते हैं कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हमारी मुश्किल समझेंगे और इस अन्याय को दूर करेंगे। 9,000 रुपये में घर चलाना मुश्किल है, धामी जी को हमारे लिए कुछ ठोस करना ही होगा।”
आगे की रणनीति: आंदोलन और उग्र होगा
आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार लिखित में शासनादेश जारी नहीं करती और सम्मानजनक मानदेय नहीं बढ़ाती, तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो वे जल्द ही भूख हड़ताल जैसे उग्र कदम भी उठा सकती हैं।
यह संघर्ष अब सिर्फ़ वेतन वृद्धि का नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और उनके काम की पहचान का बन गया है। अब देखना यह है कि धामी सरकार इन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के आंदोलन को कितनी जल्दी और कितने प्रभावी ढंग से शांत कर पाती है।
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