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The UP Transformation: गुंडाराज से एक्सप्रेसवे प्रदेश तक का सफर

By Admin@2001

Published on: November 20, 2025

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उत्तर प्रदेश का रूपांतरण आधुनिक भारत की सबसे बड़ी विकास गाथाओं में से एक है। एक ऐसा राज्य, जो अपनी विशाल जनसंख्या के कारण यदि एक स्वतंत्र देश होता, तो दुनिया का पांचवां सबसे अधिक आबादी वाला राष्ट्र होता। कुछ साल पहले तक यूपी की पहचान ‘गुंडाराज’, चरम भ्रष्टाचार, जर्जर सड़कों और सांप्रदायिक दंगों के एक केंद्र के रूप में थी। लेकिन पिछले 6-7 वर्षों में इस छवि में जो नाटकीय बदलाव आया है, उसने पूरे देश को चौंका दिया है। आज उत्तर प्रदेश भारत की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (Second Largest Economy) बनने की राह पर है और इसे गर्व से ‘एक्सप्रेसवे प्रदेश’ कहा जाता है। यह परिवर्तन और भी दिलचस्प हो जाता है जब हम 2007 के उस दौर को देखते हैं, जब तत्कालीन सरकार ने योगी आदित्यनाथ को 11 दिनों के लिए जेल भेजा था। उस समय शायद ही किसी ने सोचा था कि वही सन्यासी एक दिन सत्ता की कमान संभालकर उत्तर प्रदेश की नियति को पूरी तरह बदल देगा।

पतन की कहानी

उत्तर प्रदेश के पतन का इतिहास 1980 और 90 के दशक की उन काली यादों से जुड़ा है, जब अपराध और राजनीति का एक गहरा गठजोड़ (Mafia-Politician Nexus) शुरू हुआ। जाति-आधारित राजनीति और क्षेत्रीय दलों (जैसे सपा और बसपा) ने सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने के लिए अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे खूंखार माफियाओं को न केवल राजनीतिक संरक्षण दिया, बल्कि उन्हें माननीय भी बनाया। अतीक अहमद जैसे अपराधी, जिन पर 160 से अधिक मुकदमे थे, जेल की सलाखों के पीछे से चुनाव लड़ते और जीतते थे, जो राज्य की कानून व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने का प्रमाण था।

मेरठ का सोतीगंज इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण बना, जो चोरी की गाड़ियों को काटने का देश का सबसे बड़ा माफिया हब बन गया था। इस ‘सिम्बायोटिक रिलेशनशिप’ ने यूपी को विकास के बजाय विनाश की ओर धकेला, जिसका परिणाम यह हुआ कि आजादी के 70 साल बाद तक राज्य बुनियादी ढांचे के लिए तरसता रहा। खराब शिक्षा, बदहाल स्वास्थ्य सेवा, भ्रष्टाचार और मुजफ्फरनगर जैसे दंगों के कारण यूपी की छवि एक पिछड़े और असुरक्षित राज्य की बन गई थी, जिसकी आर्थिक विकास दर देश में 10वें पायदान पर अटकी हुई थी।

यूपी के पतन के मुख्य कारण:

  • माफिया राज: अपराधियों को विधानसभा और संसद तक पहुँचाना, जिससे उन्हें कानूनी सुरक्षा मिली।
  • सोतीगंज मॉडल: संगठित अपराध के ऐसे केंद्रों का फलना-फूलना जहाँ कानून का कोई डर नहीं था।
  • बुनियादी ढांचे की अनदेखी: दशकों तक एक्सप्रेसवे और कनेक्टिविटी जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स का अभाव।
  • सांप्रदायिक हिंसा: दंगों के कारण निवेशकों का भरोसा टूटा और राज्य ‘पहचान के संकट’ (Identity Crisis) से जूझने लगा।

The Yogi Model

2017 में जब योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला, तो उनकी शुरुआती छवि एक कठोर हिंदू नेता की थी, लेकिन उनके कार्यकाल में हुए प्रशासनिक सुधारों ने उत्तर प्रदेश को एक आधुनिक मॉडल में बदल दिया। इस ‘मिरेकल’ के केंद्र में तीन प्रमुख स्तंभ थे: सबसे पहले अपराध के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’, जिसके तहत 62 बड़े माफिया समूहों को चिन्हित कर उनकी अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाए गए और अतीक अहमद जैसे कुख्यात गैंगस्टरों के अंत के साथ राज्य में कानून का डर बहाल किया गया। यूपी पुलिस के रिस्पांस टाइम में आए सुधार और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 70.8% की उच्च सजा दर (Conviction Rate) ने निवेश के लिए एक सुरक्षित वातावरण तैयार किया। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू कनेक्टिविटी और व्यापार रहा; जहाँ राज्य ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में 12वीं से दूसरी रैंक पर पहुँच गया और ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के जरिए स्थानीय कला को वैश्विक पहचान मिली। मात्र 6 वर्षों में 13 एक्सप्रेसवे और हवाई अड्डों के विशाल नेटवर्क ने यूपी को ‘एक्सप्रेसवे प्रदेश’ बना दिया। अंततः, सरकार ने अयोध्या और काशी जैसे धार्मिक स्थलों का कायाकल्प कर ‘टेंपल इकोनॉमी’ को राज्य के विकास का नया इंजन बना दिया है, जिससे पर्यटन और रोजगार के असीम अवसर पैदा हो रहे हैं।

यूपी ट्रांसफॉर्मेशन के तीन मुख्य स्तंभ

  • सुरक्षा चक्र: माफिया राज का खात्मा और पुलिस रिफॉर्म्स के जरिए आम नागरिक और निवेशकों में विश्वास पैदा करना।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति: 3000 किमी से अधिक का एक्सप्रेसवे नेटवर्क और 15 से अधिक चालू एयरपोर्ट्स, जो आर्थिक रीढ़ बन चुके हैं।
  • आर्थिक नवाचार: ODOP के जरिए जमीनी स्तर के व्यापार को बढ़ावा देना और यूपी को $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में काम करना।
  • सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: विरासत को केवल आस्था ही नहीं, बल्कि एक ‘इकोनॉमिक एसेट’ के रूप में विकसित करना।

निष्कर्ष

निष्कर्षतः, योगी आदित्यनाथ की सफलता का मूल मंत्र उनकी अटल इच्छाशक्ति (Unwavering Stance) और दशकों से चली आ रही जाति-आधारित राजनीति के स्थान पर एक सामूहिक पहचान (Collective Identity) को स्थापित करना है। उन्होंने न केवल कानून-व्यवस्था को सुधारा, बल्कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों द्वारा स्वयं का टैक्स भरने जैसे फैसलों से प्रशासन में पारदर्शिता और जनता के बीच गहरा विश्वास पैदा किया। केंद्र और राज्य सरकार के बीच ‘डबल इंजन’ के तालमेल ने उन विशाल परियोजनाओं, जैसे राम मंदिर और एक्सप्रेसवे, के क्रियान्वयन को हकीकत में बदला जो पहले केवल चुनावी वादों और कागजों तक सीमित थे। उत्तर प्रदेश का एक ‘पिछड़े राज्य’ की श्रेणी से निकलकर विकास के पथ पर अग्रणी बनना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि राजनैतिक नेतृत्व के पास ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति और स्पष्ट विजन हो, तो किसी भी राज्य की नियति को बदला जा सकता है।

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