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Apple Zone’ की Rama Bisht: पहाड़ की शक्ति जिसने दिल्ली में जीता सम्मान, राजनीतिक हार के बाद भी नहीं हारी हिम्मत

By Admin@2001

Published on: November 19, 2025

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उत्तराखंड / नैनीताल: छोटे से पहाड़ी गाँव रामगढ़ (Ramgarh) से निकलकर, दिल्ली की भव्यता के बीच अपने गाँव और राज्य का नाम रोशन करना, किसी सपने से कम नहीं। यह कहानी है नैनीताल जिले के रामगढ़ की रहने वाली रमा बिष्ट (Rama Bisht) की, जिन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और उद्यमशीलता (Entrepreneurship) से एक नया मुकाम हासिल किया है। उन्हें हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक गरिमामय समारोह में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) द्वारा सम्मानित किया गया है।

कौन हैं Rama Bisht? पहाड़ से दिल्ली तक का सफ़र

who is Rama Bisht? यह सवाल अब केवल नैनीताल तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी सफलता की कहानी राज्य भर में सुनाई जा रही है। रमा बिष्ट एक साधारण परिवार की महिला हैं, जिन्होंने अपनी पारंपरिक खेती को आधुनिक उद्यम का रूप दिया है। वह Apple Zone” रामगढ़ नामक एक सफल ईकाई की मालकिन हैं।

उनका यह उद्यम न केवल नैनीताल की फल पट्टी को पहचान दिलाता है, बल्कि स्थानीय महिलाओं के स्वरोजगार (Self-Employment) और सशक्तिकरण (Women Empowerment) का भी एक सशक्त उदाहरण है। Apple Zone के तहत, रमा बिष्ट सेब, कीवी (Kiwi), और अन्य पहाड़ी फलों के साथ-साथ कई पारंपरिक जड़ी-बूटियों का उपयोग करके होममेड प्रोडक्ट्स (Homemade Products) बनाती हैं।

Apple Zone: केवल जाम नहीं, ‘पहाड़ी स्वाद’

Apple Zone की पहचान केवल जैम (Jam) बनाने तक सीमित नहीं है। उनके उत्पाद सूची में 100 से अधिक वस्तुएं शामिल हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  • फ्रूट जैम और चटनी: सेब, प्लम, खुमानी (Apricot), कीवी, और उत्तराखंड के प्रसिद्ध बुरांश फूल से बने उत्पाद।
  • स्वाश और जूस: विभिन्न फलों के प्राकृतिक स्क्वैश (Squash) और जूस का उत्पादन।
  • हर्बल उत्पाद: रमा बिष्ट ने जड़ी-बूटियों के महत्व को समझा और अब थाइम (Thyme), रोजमैरी (Rosemary), अजवाइन, और लेमनग्रास (Lemongrass) जैसी कई हर्ब्स (Herbs) की खेती भी करती हैं, जिनका उपयोग वे हर्बल चाय और अन्य उत्पादों में करती हैं।

यह सभी उत्पाद 100% होममेड (100% Homemade) और जैविक (Organic) होते हैं, जिससे उन्हें उपभोक्ताओं के बीच उच्च विश्वसनीयता (Credibility) प्राप्त हुई है। रमा बिष्ट इन उत्पादों के लिए कच्चा माल स्थानीय स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups) से खरीदती हैं, जिससे लगभग 50 से अधिक महिलाओं को अप्रत्यक्ष रूप से आय का स्रोत मिलता है।

मुख्यमंत्री धामी ने किया सम्मान: दिल्ली में गर्व का क्षण

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली में आयोजित एक समारोह में रमा बिष्ट को पहाड़ी संस्कृति और स्वरोजगार को बढ़ावा देने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया। मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि रमा बिष्ट जैसी उद्यमी, उत्तराखंड के उस मूल मंत्र का प्रतीक हैं, जिसमें पलायन (Migration) को रोककर स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) हासिल की जाती है।

यह सम्मान रमा बिष्ट के संघर्ष और सफलता को राष्ट्रीय पटल पर ले आया है। 2002 में अपनी ईकाई की स्थापना से लेकर राष्ट्रीय और राज्य स्तर के 20 से अधिक पुरस्कार जीतने तक, रमा बिष्ट ने साबित किया है कि सफलता के लिए दृढ़ संकल्प (Determination) सबसे बड़ी पूंजी है।

राजनीतिक चुनौती: हारकर भी प्रेरणा बनी

रमा बिष्ट की कहानी में एक और पहलू है: सार्वजनिक सेवा की ललक। उन्होंने जिला पंचायत सदस्य (Jila Panchayat Sadasya) के लिए चुनाव लड़ा था। दुर्भाग्य से, वह चुनाव जीत नहीं सकीं।

हालांकि, राजनीतिक जीत हासिल न करने के बावजूद, रमा बिष्ट की सामाजिक और आर्थिक पहल से मिली सफलता ने उन्हें एक सच्चा जननेता बना दिया है। उनका यह प्रयास दिखाता है कि वह अपने गाँव और समुदाय के लिए केवल व्यवसाय के माध्यम से ही नहीं, बल्कि सक्रिय राजनीति के माध्यम से भी बदलाव लाना चाहती थीं। चुनाव हारने के बाद भी, उन्होंने अपने उद्यम Apple Zone के माध्यम से रामगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार सृजन (Employment Generation) का काम नहीं छोड़ा, जो उनकी अटूट प्रतिबद्धता (Commitment) को दर्शाता है।

रमा बिष्ट का जीवन उन सभी लोगों के लिए एक प्रेरणास्रोत (Inspiration) है जो सोचते हैं कि छोटी जगहों से बड़े सपने नहीं देखे जा सकते। उनके समर्पण और कड़ी मेहनत ने उन्हें उत्तराखंड की एक सफल उद्यमी (Entrepreneur) और पहाड़ी महिला की पहचान दी है, जिसे आज मुख्यमंत्री ने स्वयं सम्मानित किया है।”

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