आजकल की भागदौड़ वाली ज़िंदगी में एक अजीब-सी बात देखने को मिल रही है—हर दूसरा व्यक्ति कह रहा है, “यार, मुझे बवासीर (Piles) की शिकायत हो गई है।” पहले यह समस्या सिर्फ़ ज़्यादा उम्र के लोगों में सुनाई देती थी, पर अब तो युवा पीढ़ी भी इससे परेशान है। यह सचमुच चिंता का विषय है! हम घंटों कुर्सी पर बैठे रहते हैं, न सही से खाते हैं और न ही पर्याप्त पानी पीते हैं—नतीजा यह होता है कि पेट साफ नहीं होता और प्रेशर पड़ता है। बवासीर, जिसे मेडिकल भाषा में हेमरॉयड्स (Hemorrhoids) भी कहते हैं, हमारे गुदा मार्ग (Anus) के अंदर या बाहर की नसों में सूजन या गांठें आने की वजह से होता है। चाहे वह दर्द देने वाला हो या सिर्फ़ ब्लड आने की शिकायत हो, लोगों ने इसे अब खुलकर डिस्कस करना शुरू कर दिया है। यह दिखाता है कि हमारी आधुनिक जीवनशैली (Modern Lifestyle) कितनी तेज़ी से हमारी सेहत को बिगाड़ रही है।
बवासीर क्यों होता है?
बवासीर (Piles) होने का मुख्य कारण गुदा मार्ग (Anal area) और निचले मलाशय (Lower Rectum) की नसों पर लगातार अत्यधिक दबाव पड़ना है। जब ये नसें खींचती हैं और सूज जाती हैं, तो बवासीर की समस्या पैदा होती है। आज की जीवनशैली में इसके कई बड़े ट्रिगर हैं: सबसे प्रमुख है लंबे समय तक कब्ज (Chronic Constipation) रहना। सख्त मल त्यागने के लिए ज़ोर लगाने (Straining) से नसों पर दबाव पड़ता है। इसके अलावा, शारीरिक गतिविधि की कमी और लगातार लंबे समय तक बैठे रहना (खासकर टॉयलेट सीट पर), बवासीर के जोखिम को काफी बढ़ा देते हैं। फाइबर युक्त भोजन की कमी, कम पानी पीना, और गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान गर्भाशय द्वारा नसों पर पड़ने वाला दबाव भी इसके सामान्य कारणों में शामिल है। सरल शब्दों में, जब पेट का सिस्टम सही से काम नहीं करता और नीचे के हिस्से पर अतिरिक्त तनाव पड़ता है, तो बवासीर हो जाता है।
बवासीर के लक्षण
बवासीर (Piles) के लक्षण आंतरिक (Internal) और बाहरी (External) बवासीर के प्रकार के आधार पर थोड़े भिन्न हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य लक्षण हैं जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है। सबसे आम और अक्सर देखा जाने वाला लक्षण मल त्याग (Passing stool) के दौरान या बाद में चमकदार लाल रक्त (Bright red blood) का आना है। यह रक्त दर्द रहित भी हो सकता है। इसके अलावा, गुदा मार्ग (Anal area) के आसपास खुजली (Itching), जलन और बेचैनी महसूस होना प्रमुख लक्षण हैं। बाहरी बवासीर के मामले में, गुदा के पास सूजन, गांठ या उभार महसूस हो सकता है जो छूने पर दर्द देता है। आंतरिक बवासीर कभी-कभी मलाशय से बाहर निकल आता है, जिसे प्रोलेप्स (Prolapse) कहते हैं, जिससे भारीपन और असुविधा महसूस होती है। लंबे समय तक इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने पर एनीमिया (रक्त की कमी) और गंभीर दर्द की समस्या हो सकती है।
डॉक्टर से कब संपर्क करें?
बवासीर (Piles) के अधिकांश हल्के मामले जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपचार से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे लक्षण हैं जिनके दिखाई देने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना अनिवार्य हो जाता है। यदि आपको मल त्याग के साथ भारी रक्तस्राव (Heavy rectal bleeding) हो रहा हो, या मल का रंग गहरा लाल या काला दिखाई दे, तो यह एक गंभीर चेतावनी संकेत है और इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, यदि बवासीर की गांठ में असहनीय दर्द हो रहा हो, सूजन बहुत बढ़ गई हो, या बुखार जैसे संक्रमण के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। डॉक्टर से मिलना तब भी ज़रूरी है जब घरेलू उपचार के बावजूद एक सप्ताह के भीतर लक्षणों में कोई सुधार न हो, या यदि आपको चक्कर आना या कमजोरी महसूस हो, जो लगातार रक्तस्राव के कारण एनीमिया (रक्त की कमी) का संकेत हो सकता है। किसी भी गंभीर या लगातार बनी रहने वाली असुविधा की स्थिति में विशेषज्ञ (जैसे गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या प्रोक्टोलॉजिस्ट) की सलाह लेना हमेशा सुरक्षित होता है।
क्या बवासीर का इलाज प्राकृतिक तरीके से किया जा सकता है?
हाँ, बवासीर (Piles) के शुरुआती और हल्के मामलों का इलाज और प्रबंधन प्राकृतिक तरीकों से प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। इसका केंद्रबिंदु आहार और जीवनशैली में मौलिक बदलाव लाना है। सबसे महत्वपूर्ण है कब्ज को रोकना, जिसके लिए अपने भोजन में फाइबर (Fiber) की मात्रा बढ़ाना ज़रूरी है—जैसे साबुत अनाज, फल और हरी पत्तेदार सब्जियाँ। साथ ही, शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ (पानी) पीना अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा, शारीरिक रूप से सक्रिय रहना और रोज़ाना टहलना पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। राहत पाने के लिए, गुदा क्षेत्र को गर्म पानी से भिगोने वाले सिट्ज बाथ (Sitz Bath) का उपयोग किया जा सकता है, जो सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है। कुछ लोग सूजन कम करने के लिए एलोवेरा या विच हेज़ल (Witch Hazel) जैसी प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का भी इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, गंभीर या लगातार रक्तस्राव वाले मामलों में इन प्राकृतिक उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है।
क्या खाना चाहिए और क्या नहीं: बवासीर में आहार
बवासीर (Piles) को नियंत्रित करने के लिए आहार में सबसे महत्वपूर्ण है फाइबर (Fiber) की मात्रा बढ़ाना और पानी का पर्याप्त सेवन सुनिश्चित करना। आपको अपने आहार में साबुत अनाज (जैसे दलिया, ब्राउन राइस), फल (जैसे पपीता, सेब, केला, नाशपाती), और हरी पत्तेदार सब्जियाँ (जैसे पालक, ब्रोकली) शामिल करनी चाहिए, क्योंकि ये कब्ज को रोकते हैं और मल को नरम बनाते हैं। इसके विपरीत, कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करना आवश्यक है। आपको प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ (जैसे सफ़ेद ब्रेड, पिज्जा), अधिक मसालेदार और तीखे भोजन, तेल में तले हुए स्नैक्स, और डेयरी उत्पाद (कुछ लोगों में कब्ज बढ़ाते हैं) से बचना चाहिए। साथ ही, शराब और कैफीन (जैसे चाय, कॉफी) का सेवन सीमित करना चाहिए, क्योंकि ये शरीर में निर्जलीकरण (Dehydration) पैदा कर सकते हैं, जिससे कब्ज और बवासीर के लक्षण बिगड़ सकते हैं।
निष्कर्ष
बवासीर (Piles) एक व्यापक स्वास्थ्य समस्या है जो अब केवल बुढ़ापे तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक जीवनशैली की देन बन चुकी है—जिसमें कब्ज, शारीरिक निष्क्रियता और फाइबर की कमी प्रमुख योगदानकर्ता हैं। यद्यपि इसके लक्षण (जैसे रक्तस्राव, दर्द, और खुजली) कष्टदायक हो सकते हैं, लेकिन अधिकांश हल्के मामलों का प्रबंधन प्राकृतिक तरीकों (जैसे उच्च फाइबर आहार, पर्याप्त पानी और सिट्ज़ बाथ) और सामयिक मलहमों (Ointments) से सफलतापूर्वक किया जा सकता है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि रोकथाम (Prevention) ही सबसे अच्छा उपचार है। हालांकि, यदि लक्षण गंभीर हों, रक्तस्राव लगातार हो, या एक सप्ताह के बाद भी सुधार न हो, तो तत्काल चिकित्सा परामर्श लेना आवश्यक है। सही समय पर डॉक्टर से संपर्क करना और उनके निर्देशों का पालन करना ही बवासीर को बढ़ने से रोकने और पूर्ण उपचार प्राप्त करने की कुंजी है।
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