नैनीताल/मुक्तेश्वर: उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में नैनीताल जिले का एक शांत और बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन ‘मुक्तेश्वर'(Mukteshwar) अब केवल गर्मियों की छुट्टियों का ठिकाना नहीं रह गया है। पिछले कुछ वर्षों में मुक्तेश्वर ने खुद को एक ऐसे ‘टूरिस्ट हब’ के रूप में स्थापित किया है, जहाँ अब सैलानियों की आमद केवल सीजन तक सीमित नहीं है। आज यहाँ का नजारा बदल चुका है—चाहे कड़ाके की ठंड हो या मानसून की फुहारें, मुक्तेश्वर में पर्यटकों की रौनक साल भर बनी रहती है।
मुक्तेश्वर (Mukteshwar) की लोकप्रियता बढ़ने के पीछे एक बड़ा कारण नीम करोली बाबा का कैंची धाम भी है। वर्तमान में जो भी श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए कैंची धाम पहुँचता है, वह मुक्तेश्वर की शांत वादियों और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए यहाँ जरूर आता है। यहाँ की शुद्ध हवा, हिमालय की बर्फीली चोटियों का दीदार और यहाँ के सरल-हृदय लोग पर्यटकों को बार-बार यहाँ आने के लिए आकर्षित करते हैं।
मुक्तेश्वर(Mukteshwar) का नाम यहाँ स्थित 350 साल पुराने मुक्तेश्वर महादेव मंदिर के नाम पर पड़ा है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहाँ से मिलने वाला आत्मिक सुकून सैलानियों को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है। मंदिर के ठीक पीछे स्थित है ‘चौली की जाली’ (Chauli ki Jali)। यह व्यू पॉइंट अपनी रोमांचक चट्टानों और गहरी खाइयों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ से पूरी कुमाऊं घाटी का जो विहंगम दृश्य दिखता है, वह पर्यटकों के लिए किसी सपने से कम नहीं होता। एडवेंचर के शौकीन लोग यहाँ रॉक क्लाइंबिंग और रैपलिंग का भी आनंद लेते हैं।
मुक्तेश्वर(Mukteshwar) का पर्यटन हब के रूप में उभरना स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खोल रहा है, जहाँ ‘पहाड़ी स्वाद’ और ‘होमस्टे’ आजीविका का मुख्य आधार बन गए हैं। अब स्थानीय युवाओं को रोजगार की तलाश में पलायन नहीं करना पड़ रहा है, क्योंकि वे अपने ही घरों के पास स्टॉल लगाकर पर्यटकों को पहाड़ी राजमा-चावल, भट्ट की चुड़कानी और मंडवे की रोटी जैसे पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखा रहे हैं। इसके साथ ही, होमस्टे (Homestays) के बढ़ते चलन ने पर्यटन की परिभाषा बदल दी है; पर्यटक अब विलासितापूर्ण होटलों के बजाय ग्रामीणों के पारंपरिक घरों में रुकना अधिक पसंद कर रहे हैं। इससे न केवल सैलानियों को पहाड़ की संस्कृति और सादगी को करीब से महसूस करने का मौका मिल रहा है, बल्कि स्थानीय निवासियों का भी वास्तविक आर्थिक सशक्तिकरण हो रहा है, जिससे उनकी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आया है।
पहले माना जाता था कि पहाड़ों में केवल मई-जून या बर्फबारी के दौरान ही भीड़ होती है। लेकिन मुक्तेश्वर ने इस धारणा को तोड़ दिया है। अब यहाँ ‘ऑफ-सीजन’ जैसा कुछ नहीं बचा। लोग शांति की तलाश में और ‘वर्क फ्रॉम माउंटेन्स’ (Work from Mountains) के लिए साल भर यहाँ आ रहे हैं। यहाँ का बढ़ता पर्यटन ढांचा यह संकेत दे रहा है कि आने वाले कुछ वर्षों में मुक्तेश्वर देश के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की सूची में शीर्ष पर होगा।
जिस तरह से मुक्तेश्व (Mukteshwar) की प्रसिद्धि बढ़ रही है, वह दिन दूर नहीं जब यह नैनीताल की तरह ही एक बड़ा पर्यटन केंद्र बनेगा। हालांकि, स्थानीय लोगों का मानना है कि इस विकास के साथ-साथ प्रकृति और स्वच्छता का ध्यान रखना भी जरूरी है। मुक्तेश्वर की खूबसूरती इसके घने बांज और बुरांश के जंगलों में है, जिसे बचाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
यहाँ मुक्तेश्वर की यात्रा और वहां के पर्यटन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर दिए गए हैं, जो पर्यटकों के लिए सहायक साबित होंगे:
1. मुक्तेश्वर घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
मुक्तेश्वर साल भर घूमने के लिए उपयुक्त है। हालांकि, बर्फबारी का आनंद लेने के लिए जनवरी-फरवरी और सुखद मौसम के लिए मार्च से जून तथा सितंबर से नवंबर का समय सबसे अच्छा माना जाता है। अब यहाँ पर्यटक ऑफ-सीजन में भी भारी संख्या में आते हैं।
2. कैंची धाम से मुक्तेश्वर की दूरी कितनी है और वहाँ कैसे पहुँचें?
कैंची धाम (नीम करोली बाबा आश्रम) से मुक्तेश्वर की दूरी लगभग 50-55 किलोमीटर है। आप टैक्सी या निजी वाहन से भवाली-रामगढ़ मार्ग होते हुए लगभग 2 घंटे में मुक्तेश्वर पहुँच सकते हैं।
3. मुक्तेश्वर में ‘चौली की जाली’ क्यों प्रसिद्ध है?
‘चौली की जाली’ अपनी ऊँची चट्टानों और वहां से दिखने वाले हिमालय के अद्भुत दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा, यहाँ रॉक क्लाइंबिंग और ज़िप-लाइनिंग जैसी साहसिक गतिविधियाँ (Adventure Sports) भी आयोजित की जाती हैं।
4. क्या मुक्तेश्वर में रुकने के लिए अच्छे विकल्प उपलब्ध हैं?
हाँ, मुक्तेश्वर अब अपने बेहतरीन होमस्टे (Home-stays) के लिए जाना जाता है। इसके अलावा यहाँ बजट होटल से लेकर लग्जरी रिजॉर्ट्स भी उपलब्ध हैं। होमस्टे में रुकने से आपको स्थानीय संस्कृति और पहाड़ी भोजन का अनुभव बेहतर तरीके से मिलता है।
5. मुक्तेश्वर में कौन सा स्थानीय भोजन (Pahari Food) जरूर ट्राई करना चाहिए?
यहाँ के स्टॉल्स पर आपको भट्ट की चुड़कानी, मंडवे की रोटी, पहाड़ी रायता, गहत की दाल और आलू के गुटके जरूर चखने चाहिए। साथ ही यहाँ का बुरांश का शरबत और पहाड़ी आडू-खुमानी के जैम भी काफी प्रसिद्ध हैं।
6. क्या मुक्तेश्वर में ट्रैकिंग के विकल्प भी हैं?
हाँ, मुक्तेश्वर के आसपास कई छोटे और मध्यम स्तर के ट्रैकिंग ट्रेल्स हैं। आप बांज और देवदार के घने जंगलों के बीच पैदल यात्रा का आनंद ले सकते हैं, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग जैसा अनुभव है।
7. मुक्तेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन का समय क्या है?
यह मंदिर सुबह सूर्योदय से शाम सूर्यास्त तक खुला रहता है। शिवरात्रि और सावन के महीने में यहाँ विशेष रौनक रहती है।
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