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Kanpur Rape Case: कानपुर में 14 साल की लड़की के साथ गैंगरेप, Black Scorpio में उठा ले गए

By Admin@2001

Published on: January 8, 2026

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Kanpur Rape Case

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Kanpur Rape Case: उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है जिसने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज के उस भरोसे को भी चकनाचूर कर दिया है जो हम ‘खाकी’ पर करते हैं। एक 14 साल की मासूम बच्ची, जिसके सिर से मां का साया पहले ही उठ चुका है और पिता बीमारी से जूझ रहे हैं, वह आज न्याय की गुहार लगा रही है।

बताया जा रहा है, घटना सोमवार रात की है। सचेंडी इलाके में रहने वाली सातवीं क्लास की यह छात्रा जब घर से बाहर निकली, तो उसे अंदाजा भी नहीं था कि बाहर भेड़िये घात लगाए बैठे हैं। एक काले रंग की स्कॉर्पियो आकर रुकी और पलक झपकते ही मासूम को अंदर खींच लिया गया।

हैरानी और शर्म की बात यह है कि उस गाड़ी को चलाने वाला कोई मामूली अपराधी नहीं, बल्कि पुलिस विभाग का एक दारोगा (सब-इंस्पेक्टर अमित कुमार मौर्य) था। अगले दो घंटों तक उस चलती गाड़ी में जो हुआ, वह सुनकर किसी भी पत्थर दिल इंसान की रूह कांप जाए। रेलवे ट्रैक के पास सुनसान इलाके में ले जाकर बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। जब वह अधमरी और बेहोश हो गई, तो उसे उसके घर के बाहर कूड़े की तरह फेंक कर अपराधी फरार हो गए।

जब बच्ची को होश आया और उसने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई, तो भाई उसे लेकर न्याय की उम्मीद में पुलिस चौकी पहुंचा। लेकिन वहां जो हुआ वह और भी डरावना था। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जैसे ही उन्होंने बताया कि आरोपी एक ‘पुलिसवाला’ है, पुलिस ने उनकी मदद करने के बजाय उन्हें डांटकर भगा दिया।

जब पुलिस ने हाथ खड़े कर दिए, तब परिवार ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। वीडियो वायरल होने और चौतरफा दबाव बनने के बाद प्रशासन की नींद टूटी। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए DCP (पश्चिम) दिनेश चंद्र त्रिपाठी को पद से हटा दिया और सचेंडी के थानेदार (SHO) विक्रम सिंह को निलंबित कर दिया गया क्योंकि उन्होंने मामले को दबाने की कोशिश की थी। साथ ही इस मामले में आरोपी यूट्यूबर शिवबरन यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन मुख्य आरोपी दारोगा अमित कुमार मौर्य अभी भी फरार है।

कानपुर की इस घटना (Kanpur Rape Case) पर उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि अपराध करने वाला चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उत्तर प्रदेश के डीजीपी (DGP) ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं है, यह उस भरोसे की हत्या है जो एक आम आदमी पुलिस पर करता है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो जनता किसके पास जाए? एक तरफ यूपी सरकार ‘मिशन शक्ति’ और ‘पिंक बूथ’ के जरिए महिला सुरक्षा के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस विभाग के अपने ही कर्मचारी इस तरह की घिनौनी करतूतों को अंजाम दे रहे हैं।

आज उस 14 साल की बच्ची की आंखों में जो खौफ है, उसका जिम्मेदार कौन है? क्या उसे और उसके गरीब परिवार को कभी वह न्याय मिल पाएगा, जिसकी वे हकदार हैं? या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

कानपुर की यह ताजा घटना हमें याद दिलाती है कि जब तक कानून का डर, पुलिस की जवाबदेही और समाज की सोच नहीं बदलेगी, तब तक “बेटी बचाओ” सिर्फ एक नारा बनकर रह जाएगा। यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम एक ऐसा माहौल बनाएं जहाँ अपराधी को सजा मिले और पीड़िता को सम्मान के साथ न्याय।

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