G RAM G: साल 2005 में शुरू हुई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) ने भारत के 1.4 अरब लोगों में से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले 65% आबादी के लिए एक सुरक्षा कवच का काम किया है। विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान, जब शहरों से लाखों लोग वापस गांवों की ओर लौटे, तब इसी योजना ने करोड़ों परिवारों को भुखमरी से बचाया। लेकिन अब, सरकार ने इस ऐतिहासिक कानून को बदलकर VB-G RAM G एक्ट बना दिया है।
G RAM G बिल क्या है?
G RAM G बिल (Vikas Bharat-Global Rojgar Ajeevika Mission) साल 2025 में पारित एक नया कानून है, जिसे मनरेगा (MGNREGA) योजना को बदलकर और उसके पुनर्गठन के उद्देश्य से लाया गया है। इस बिल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत में रोजगार की व्यवस्था को आधुनिक बनाना और इसे ‘मिशन मोड’ में संचालित करना है। इस नए कानून के तहत, प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए रोजगार की गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। हालाँकि, इस बिल ने महत्वपूर्ण बदलाव भी किए हैं, जैसे कि योजना के नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाना और फंडिंग मॉडल को बदलकर केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात में करना। जहाँ सरकार इसे भ्रष्टाचार मुक्त और कौशल आधारित विकास का माध्यम बता रही है, वहीं आलोचक इसे राज्यों पर वित्तीय बोझ डालने और रोजगार के ‘कानूनी अधिकार’ को कमजोर करने वाला कदम मान रहे हैं।
G RAM G बिल के फायदे और नुकसान
(G RAM G) बिल के पक्ष और विपक्ष में कई महत्वपूर्ण तर्क दिए जा रहे हैं। इसके फायदे की बात करें तो, सरकार ने रोजगार की गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया है, जिससे ग्रामीण परिवारों को अधिक आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, इसे ‘मिशन मोड’ में लाने से जल संरक्षण और ग्रामीण बुनियादी ढांचे जैसे स्थायी संपत्ति निर्माण पर जोर दिया जाएगा, और नई तकनीक (AI व GPS) के इस्तेमाल से भ्रष्टाचार पर लगाम लगने का दावा किया जा रहा है। दूसरी ओर, इसके नुकसान और चुनौतियों की बात करें तो, फंडिंग के 60:40 मॉडल ने राज्यों पर भारी वित्तीय बोझ डाल दिया है, जिससे गरीब राज्यों के लिए योजना को सुचारू रूप से चलाना कठिन हो सकता है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कानून की कुछ नई धाराएं केंद्र को यह तय करने की शक्ति देती हैं कि योजना कहाँ और कब लागू होगी, जिससे मजदूरों का ‘काम पाने का कानूनी अधिकार’ (Legal Right to Work) कमजोर होकर सरकार की इच्छा पर निर्भर हो सकता है।
विपक्ष का आरोप
जी राम जी (G RAM G) बिल को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखे प्रहार किए हैं और इसे ‘गरीब विरोधी’ कदम बताया है। विपक्ष का मुख्य आरोप यह है कि सरकार ने इस योजना से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाकर राजनीतिक प्रतिशोध का परिचय दिया है। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों का दावा है कि फंडिंग के अनुपात को 60:40 करना दरअसल राज्यों के अधिकारों का हनन है, क्योंकि गरीब राज्यों के पास 40% हिस्सा देने के लिए पर्याप्त बजट नहीं होगा, जिससे अंततः यह योजना दम तोड़ देगी। इसके अलावा, विपक्ष ने ‘125 दिन के काम’ के वादे को केवल एक ‘चुनावी जुमला’ करार दिया है, क्योंकि वर्तमान में 100 दिन का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पा रहा है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि इस नए कानून ने काम के ‘कानूनी अधिकार’ को खत्म कर इसे केंद्र सरकार की ‘मर्जी’ पर निर्भर बना दिया है, जिससे ग्रामीण गरीबों की आजीविका पर संकट गहरा सकता है।
इसे भी पढ़ें: तीसरे विश्व युद्ध(World War III) की धमकी? Trump की चेतावनी और NATO का रूस पर बड़ा आरोप!
पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. G RAM G बिल का पूरा नाम क्या है और यह क्यों लाया गया है?
उत्तर: इसका पूरा नाम ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन’ (Viksit Bharat – G RAM G) है। सरकार का तर्क है कि 20 साल पुराने मनरेगा (MGNREGA) ढांचे में कई कमियां थीं और इसे ‘विकसित भारत 2047’ के विजन से जोड़ने और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए यह नया कानून लाया गया है।
2. नए कानून में काम के दिनों की संख्या में क्या बदलाव हुआ है?
उत्तर: नए बिल के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए कानूनी रूप से गारंटीकृत कार्य दिवसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है।
3. क्या इस योजना में केंद्र और राज्यों के बीच खर्च का बँटवारा बदल गया है?
उत्तर: हाँ, यह सबसे बड़ा बदलाव है। पहले केंद्र सरकार अकुशल मजदूरी का 100% खर्च उठाती थी। अब यह एक ‘केंद्र प्रायोजित योजना’ बन गई है, जिसमें फंडिंग का अनुपात 60:40 (केंद्र:राज्य) होगा। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 रखा गया है।
4. ‘एग्रीकल्चरल पॉज’ (Agricultural Pause) क्या है?
उत्तर: नए कानून के अनुसार, राज्य सरकारें बुवाई और कटाई के व्यस्त सीजन के दौरान साल में अधिकतम 60 दिनों के लिए योजना के तहत काम रोक सकती हैं। इसका उद्देश्य खेती के समय किसानों को मजदूरों की कमी से बचाना है।
5. क्या मजदूरी के भुगतान के नियमों में कोई सुधार हुआ है?
उत्तर: हाँ, नए बिल में मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक (Weekly) आधार पर करने का प्रावधान है। यदि 15 दिनों के भीतर भुगतान नहीं होता है, तो मजदूर मुआवजे के हकदार होंगे।
6. भ्रष्टाचार रोकने के लिए इसमें क्या नई तकनीकें शामिल हैं?
उत्तर: योजना में पारदर्शिता के लिए AI-आधारित फ्रॉड डिटेक्शन, बायोमेट्रिक्स, जियो-टैगिंग और जीपीएस (GPS) आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग को अनिवार्य बनाया गया है।
Leave a Comment