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जापान में 7.6 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, 10 लोग घायल (Earthquake in Japan)

By Admin@2001

Published on: December 9, 2025

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earthquake in Japan

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नई दिल्ली: जापान के उत्तरी प्रशांत तट पर सोमवार देर रात प्रकृति का जबरदस्त कोहराम देखने को मिला, जब 7.6 तीव्रता के एक विनाशकारी भूकंप ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र मिसावा (Misawa) के समीप जमीन से 53 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था, जिसने स्थानीय समयानुसार रात 11:15 बजे लोगों को दहशत में डाल दिया। इस शक्तिशाली झटके के तुरंत बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने 3 मीटर (10 फीट) ऊंची सुनामी की चेतावनी जारी कर दी, जिससे तटीय इलाकों में अफरा-तफरी मच गई और हजारों लोगों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा। हालांकि, कुछ घंटों के तनावपूर्ण इंतजार के बाद राहत की खबर आई कि समुद्र की लहरें 70 सेंटीमीटर तक ही सीमित रहीं, जिसके बाद सुनामी की चेतावनी वापस ले ली गई।

कितना नुकसान हुआ है?

मंगलवार, 9 दिसंबर 2025 की सुबह तक प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, जापान में आए शक्तिशाली भूकंप ने जान-माल को प्रभावित किया है, जिसमें कम से कम 10 लोग घायल हुए हैं। विशेषकर उत्तरी द्वीप होक्काइडो में स्थिति तनावपूर्ण रही, जहाँ एक व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है और निवासियों ने लगभग 30 सेकंड तक तीव्र कंपन महसूस किया। भूकंप के तत्काल बाद आओमोरी (Aomori) क्षेत्र के लगभग 2,700 घरों में बिजली गुल हो गई और कई स्थानों पर आग लगने की घटनाएँ भी दर्ज की गईं। राहत की बात यह रही कि हिगाशिदोरी और ओनागावा परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या रिसाव की खबर नहीं आई है, जिससे बड़े खतरे की आशंका टल गई। एहतियात के तौर पर, इंजीनियरों द्वारा पटरियों की सुरक्षा जाँच सुनिश्चित करने के लिए शिंकानसेन बुलेट ट्रेन सेवा को कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया गया था।

क्या बोली जापान की PM?

भूकंप के बाद की स्थिति को देखते हुए, जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने मंगलवार सुबह देश को संबोधित करते हुए निवासियों से अत्यधिक सतर्कता बरतने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य झटकों के बाद आने वाले आफ्टरशॉक्स (Aftershocks) का खतरा अभी टला नहीं है, इसलिए अगले एक सप्ताह तक मौसम विभाग (JMA) और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों को सलाह दी कि वे अपने घरों में भारी फर्नीचर को ठीक से फिक्स (Secure) रखें ताकि वे गिरने से चोट न पहुँचा सकें। साथ ही, उन्होंने किसी भी नए झटके की स्थिति में तुरंत सुरक्षित स्थानों की ओर निकलने (Evacuate) के लिए मानसिक और व्यावहारिक रूप से तैयार रहने का निर्देश दिया है, ताकि जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

जापान में इतने भूकंप क्यों आते हैं?

जापान की धरती के नीचे होने वाली निरंतर उथल-पुथल का मुख्य कारण इसका चार विशाल टेक्टोनिक प्लेटों—प्रशांत, फिलीपीन, यूरेशियन और उत्तरी अमेरिकी प्लेट—के संगम (Junction) पर स्थित होना है। इन प्लेटों के आपसी घर्षण और टकराव के कारण इस क्षेत्र में भूगर्भीय तनाव बना रहता है, जो बार-बार भूकंप के रूप में बाहर निकलता है। विशेष रूप से, यहाँ का सबडक्शन ज़ोन सबसे अधिक संवेदनशील है, जहाँ प्रशांत प्लेट हर साल कुछ सेंटीमीटर की दर से यूरेशियन प्लेट के नीचे धंसती जा रही है। जब यह संचित ऊर्जा अचानक मुक्त होती है, तो न केवल शक्तिशाली भूकंप आते हैं, बल्कि समुद्र के भीतर हलचल होने से विनाशकारी सुनामी का खतरा भी पैदा हो जाता है। इसके अतिरिक्त, प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ का हिस्सा होने के कारण यहाँ सक्रिय ज्वालामुखियों की एक लंबी श्रृंखला है, जो इस पूरे क्षेत्र को दुनिया के सबसे अस्थिर और खतरनाक भूकंपीय क्षेत्रों में से एक बनाती है।

2011 का विनाशकारी भूकंप

जापान का इतिहास प्राकृतिक आपदाओं के साथ संघर्ष और उनके विरुद्ध खड़े होने की अदम्य इच्छाशक्ति का प्रतीक रहा है। यहाँ के नागरिक बचपन से ही इन आपदाओं के साथ जीने और उनसे निपटने के लिए प्रशिक्षित किए जाते हैं। इस सतर्कता का सबसे बड़ा कारण 2011 का ‘तौहोकू’ (Tohoku) महा-भूकंप है, जिसकी 9.0 तीव्रता ने देश को दहला दिया था। उस समय आई विनाशकारी सुनामी ने देखते ही देखते तटों को तबाह कर दिया, जिसमें लगभग 18,500 लोग काल के ग्रास बन गए या हमेशा के लिए लापता हो गए। इस त्रासदी ने फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र में एक भीषण ‘मेल्टडाउन’ को जन्म दिया, जो चेरनोबिल के बाद दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु आपदा मानी जाती है। इसी कड़वे अनुभव ने जापान को आज दुनिया का सबसे सुरक्षित और आपदा-तैयार (Disaster-ready) राष्ट्र बना दिया है, जहाँ तकनीक और सामुदायिक अनुशासन मिलकर हर खतरे का सामना करते हैं।

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