15 जुलाई 2020 की वह तारीख इतिहास में एक ‘डिजिटल भूकंप’ के रूप में दर्ज है, जिसने साइबर सुरक्षा की दुनिया को हिलाकर रख दिया था। कल्पना कीजिए—एलोन मस्क, जेफ बेजोस, बिल गेट्स, बराक ओबामा, जो बाइडन और एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियों के आधिकारिक ट्विटर (अब X) अकाउंट्स एक साथ हैक हो गए। इस अभूतपूर्व हमले ने न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था में हड़कंप मचा दिया, बल्कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों, सीआईए (CIA) और एफबीआई (FBI) की रातों की नींद उड़ा दी। विशेषज्ञों को लगा कि यह रूस या चीन जैसे किसी शक्तिशाली देश द्वारा शुरू किया गया ‘साइबर युद्ध’ (Cyber Warfare) है, जिसका उद्देश्य अमेरिका की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता को नष्ट करना है। लेकिन जब इस हमले के पीछे के मास्टरमाइंड का नाम सामने आया, तो पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई। इसके पीछे कोई खुफिया एजेंसी या बड़ा हैकर ग्रुप नहीं, बल्कि फ्लोरिडा का एक 17 साल का किशोर, ग्राहम इवान क्लार्क था, जो अपने कमरे में बैठकर रेड बुल पीते हुए दुनिया के सबसे सुरक्षित समझे जाने वाले सिस्टम को चकनाचूर कर रहा था।
एक नौजवान की आपराधिक यात्रा
ग्राहम इवान क्लार्क के एक अपराधी बनने की शुरुआत उसके एकाकी बचपन और इंटरनेट की आभासी दुनिया में डूबे रहने के कारण हुई। मात्र 13 साल की उम्र में, Minecraft जैसे गेम को उसने कमाई का जरिया बनाया, जहाँ ‘Open’ नाम की पहचान के साथ दुर्लभ डिजिटल आइटम्स बेचने के बहाने उसने अपने ही फॉलोअर्स से हजारों डॉलर ठग लिए। उसकी यह आपराधिक प्रवृत्ति तब और गंभीर हो गई जब उसने खुद को एक्सपोज करने वाले एक यूट्यूबर से बदला लेने के लिए उसकी पूरी डिजिटल पहचान हैक कर ली। यहाँ से ग्राहम ने ‘सिम स्वैपिंग’ (SIM Swapping) जैसी खतरनाक तकनीक सीखी, जिसके जरिए वह फर्जी आईडी का उपयोग कर किसी भी व्यक्ति का मोबाइल नंबर अपने पास ट्रांसफर कर लेता था। इसी तकनीक के बल पर 16 साल की उम्र में उसने प्रसिद्ध क्रिप्टो निवेशक ग्रेग बेनेट के अकाउंट से 1 मिलियन डॉलर (लगभग ₹7 करोड़) मूल्य के बिटकॉइन चुराकर सुरक्षा एजेंसियों को हिलाकर रख दिया। यह घटना महज एक चोरी नहीं थी, बल्कि उसके भीतर पनपते एक खतरनाक साइबर अपराधी के ‘मास्टरमाइंड’ बनने का पहला बड़ा संकेत थी।
दुनिया को हिलाने का पल
ग्रेग बेनेट से 1 मिलियन डॉलर की चोरी के बावजूद, ग्राहम क्लार्क कानून की नजरों में ‘माइनर’ (नाबालिग) होने का फायदा उठाकर एक आसान ‘प्ली डील’ के जरिए बच निकला। इस कानूनी ढील ने उसके हौसलों को इतना बढ़ा दिया कि उसने दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, Twitter को अपना अगला निशाना बनाया। ग्राहम ने इसके लिए किसी जटिल कोडिंग या मालवेयर का नहीं, बल्कि ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का सहारा लिया। 2020 की महामारी के दौरान जब ट्विटर के कर्मचारी वर्क-फ्रॉम-होम कर रहे थे, ग्राहम ने आईटी सपोर्ट स्टाफ बनकर उन्हें कॉल किया और ‘स्पेयर फिशिंग’ के जरिए उन्हें एक फर्जी लॉगिन पेज पर फँसा लिया। जैसे ही कर्मचारियों ने अपनी जानकारी दर्ज की, ग्राहम को ट्विटर के उस सीक्रेट ‘गॉड मोड’ (God Mode Tool) का एक्सेस मिल गया, जिसे इंटरनली ‘ट्विटर एडमिन पैनल’ कहा जाता था। इस टूल की मदद से वह बिना किसी पासवर्ड या टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन के दुनिया के किसी भी शक्तिशाली व्यक्ति के अकाउंट को नियंत्रित कर सकता था—यहीं से उस वैश्विक डिजिटल हमले की शुरुआत हुई जिसने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया।
210 साल की सजा या 3 साल की कैद?
पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सूचना तंत्र को घुटनों पर लाने की ताकत होने के बावजूद, ग्राहम क्लार्क ने एक अपरिपक्व मानसिकता का परिचय देते हुए इतने बड़े ‘गॉड मोड’ एक्सेस का उपयोग केवल एक साधारण बिटकॉइन स्कैम के लिए किया। उसने 130 हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स से ‘पैसे दोगुने करने’ का संदेश ट्वीट कर मात्र 120,000 डॉलर कमाए, जो उसकी क्षमता के मुकाबले बेहद कम थे। हालांकि, उसकी दो बड़ी गलतियों—पुराने बिटकॉइन वॉलेट का पुन: उपयोग और ऑनलाइन फोरम पर अपनी गतिविधियों की चर्चा करना—ने एफबीआई (FBI) के लिए उसे ट्रैक करना आसान बना दिया। 31 जुलाई 2020 को उसकी गिरफ्तारी हुई, जहाँ 30 गंभीर आरोपों के बावजूद फ्लोरिडा के ‘माइनर लॉ’ ने उसे उम्रकैद से बचा लिया। उसे मात्र 3 साल की जेल हुई, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जेल से बाहर आने तक उसके पास मौजूद बिटकॉइन की कीमत बढ़कर 9 मिलियन डॉलर हो चुकी थी। यह घटना साबित करती है कि तकनीकी सुरक्षा चाहे कितनी भी मजबूत क्यों न हो, ‘इंसानी कमजोरी’ (Human Error) हमेशा साइबर सुरक्षा की सबसे कमजोर कड़ी बनी रहती है।
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