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AIIMS ऋषिकेश के डॉक्टरों वाली पार्टी का वीडियो हुआ वायरल, छात्र-छात्राएं नशे में धुत?

By Admin@2001

Published on: October 29, 2025

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देहरादून: ऋषिकेश के एम्स (AIIMS) में चल रहे एक बड़े कार्यक्रम की जो खबर सामने आई है, वो सुनकर सबके होश उड़ गए हैं! सोशल मीडिया पर एक वीडियो एकदम तूफान की तरह वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि देश के इतने बड़े मेडिकल कॉलेज के कुछ MBBS स्टूडेंट (लड़के-लड़कियां) एक प्रोग्राम के दौरान कथित तौर पर नशे में झूमते और नाचते हुए पकड़े गए हैं।

सोचिए, ये वो युवा हैं जो कल को हमारे डॉक्टर बनेंगे, हमारी जान संभालेंगे! अगर ये खुद ही ऐसी हरकतों में पड़े रहेंगे, तो लोग किस पर भरोसा करेंगे? ये वीडियो सिर्फ चौंकाने वाला नहीं है, बल्कि देश के पूरे स्वास्थ्य सिस्टम के लिए खतरे की घंटी जैसा है।

असल में, एम्स(AIIMS) ऋषिकेश हर साल Pyrexia नाम का एक इंटर-कॉलेज फेस्ट रखता है। इसका मकसद होता है कि डॉक्टर बनने की पढ़ाई के भारी-भरकम तनाव से स्टूडेंट्स को थोड़ा ब्रेक मिले, वो आपस में मिलें और कुछ मस्ती-मजाक कर लें। पर इस बार की मस्ती थोड़ी ज्यादा ही हो गई लगती है! वायरल वीडियो में साफ-साफ Pyrexia का बैनर दिख रहा है और छात्र-छात्राएं आउट ऑफ कंट्रोल होकर झूम रहे हैं।

ये वीडियो देखकर सोशल मीडिया पर जनता भड़की हुई है। लोग कह रहे हैं, “भाई, ये क्या चल रहा है? इन्हें तो सेवा करनी चाहिए, ये तो खुद ही बहक गए हैं!” सीनियर्स डॉक्टर्स भी टेंशन में हैं, उनका कहना है कि डॉक्टर की डिग्री सिर्फ पढ़ने से नहीं, बल्कि समझदारी और जिम्मेदारी से मिलती है। अगर समझ ही नहीं है, तो फिर क्या फायदा?

एम्स(AIIMS) ने क्या कहा?

हालांकि एम्स(AIIMS) ऋषिकेश ने अभी तक मुंह नहीं खोला है, लेकिन अंदरूनी खबर है कि सीक्रेट जाँच शुरू हो गई है। एम्स जैसे संस्थानों में अनुशासन (Discipline) बहुत सख्त होता है। अगर ये वीडियो सच निकला, तो इन स्टूडेंट्स पर तगड़ी कार्रवाई होना पक्का है।

ये घटना सिर्फ एक पार्टी का वीडियो नहीं है, बल्कि हमारे समाज के लिए रेड अलर्ट है। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि पढ़ाई का प्रेशर और दोस्तों का दबाव (Peer Pressure) युवाओं को नशे की तरफ धकेलता है। डॉक्टरों और प्रशासन का कहना है कि हमें कॉलेजों में सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि मेंटल हेल्थ काउंसलिंग और सही दिशा दिखाने की सख्त जरूरत है।

बात सीधी है: जब डॉक्टर बनने वाले ही अपनी सुध-बुध खो देंगे, तो समाज का इलाज कौन करेगा? ये सबके लिए सोचने का टाइम है—स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और कॉलेज प्रशासन—सबको मिलकर इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा।

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