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Vaishnavi Sharma: वैष्णवी शर्मा का बैकग्राउंड क्या है? 5 साल की थी जब..

By Admin@2001

Published on: December 30, 2025

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Vaishnavi Sharma

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Vaishnavi Sharma: वैष्णवी शर्मा को अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किए अभी महज एक हफ्ता ही हुआ है, लेकिन उनकी फिरकी का जादू प्रशंसकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। युवा क्रिकेट प्रेमी इस उभरती हुई खिलाड़ी की प्रतिभा के इस कदर कायल हो गए हैं कि इंटरनेट पर उन्हें खोजने और उनके बारे में जानने की होड़ मची हुई है।

श्रीलंका के खिलाफ जारी टी20 सीरीज में भारतीय टीम ने 4-0 की प्रचंड बढ़त बना ली है। जहाँ एक तरफ स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा जैसे अनुभवी सितारे रनों की बारिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ 21 वर्षीय युवा वैष्णवी शर्मा(Vaishnavi Sharma) अपने पदार्पण (डेब्यू) सीरीज में ही चर्चा का मुख्य विषय बन गई हैं। ग्वालियर की इस उभरती हुई बाएं हाथ की स्पिनर ने सीरीज के चार मैचों में हालांकि 15 ओवर फेंककर 4 विकेट लिए हैं, लेकिन उनकी किफायती गेंदबाजी और मैदान पर उनके आत्मविश्वास ने फैंस का दिल जीत लिया है। आलम यह है कि सोशल मीडिया से लेकर गूगल सर्च तक, हर जगह वैष्णवी की तस्वीरें और उनके क्रिकेटिंग सफर की बातें हो रही हैं। बहुत कम समय में उन्होंने खुद को भारतीय महिला क्रिकेट की अगली बड़ी उम्मीद के रूप में स्थापित कर लिया है।

Vaishnavi Sharma: पांच साल से खेलना शुरू

ग्वालियर की मिट्टी में जन्मी वैष्णवी शर्मा(Vaishnavi Sharma) ने भारतीय क्रिकेट के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया है। वह चंबल संभाग की पहली ऐसी महिला क्रिकेटर बनी हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की जर्सी पहनने का गौरव प्राप्त हुआ है। उनके क्रिकेट के प्रति जुनून का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने महज पांच साल की नन्हीं उम्र में ही मैदान पर पसीना बहाना और प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया था।

उनकी इस असाधारण प्रतिभा को घरेलू क्रिकेट में भी बड़ी पहचान मिली, जब साल 2022-23 के जूनियर डोमेस्टिक सीजन में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्रतिष्ठित ‘जगमोहन डालमिया ट्रॉफी’ (सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटर) से नवाजा गया। बचपन से शुरू हुआ यह सफर आज चंबल और पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुका है।

वैष्णवी शर्मा(Vaishnavi Sharma), एक प्रतिभाशाली बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाज हैं जो अपनी फिरकी से बल्लेबाजों को छकाने में माहिर हैं। गेंदबाजी के अलावा, वह निचले क्रम में आकर आक्रामक बल्लेबाजी करने की क्षमता भी रखती हैं, जो उन्हें टीम के लिए एक बेहतरीन ऑलराउंडर विकल्प बनाता है। मात्र 21 वर्ष की आयु में अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकने वाली वैष्णवी मध्य प्रदेश के ग्वालियर की रहने वाली हैं और घरेलू स्तर पर वह मध्य प्रदेश की टीम का प्रतिनिधित्व करती हैं। अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने बहुत कम उम्र में घरेलू क्रिकेट से लेकर टीम इंडिया की नीली जर्सी तक का सफर तय किया है।

वैष्णवी शर्मा (Vaishnavi Sharma) की सफलता के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प और प्रेरणा देने वाली है। उनके पिता, जो पेशे से एक सम्मानित प्रोफेसर और ज्योतिषाचार्य हैं, उन्होंने अपनी बेटी की प्रतिभा को समय रहते पहचान लिया था। उन्होंने वैष्णवी के सामने करियर के दो विकल्प रखे थे—खेल या चिकित्सा क्षेत्र। पिता का मानना था कि इन दोनों में से किसी भी क्षेत्र को चुनने पर उनकी बेटी सफलता की नई ऊंचाइयों को छुएगी।

जब वैष्णवी ने अपने जुनून यानी क्रिकेट को करियर के रूप में चुना, तो उनके परिवार ने किसी भी सामाजिक रूढ़िवादिता की परवाह किए बिना उनका पूरा साथ दिया। परिवार के इसी अटूट विश्वास और समर्थन का सुखद परिणाम आज पूरी दुनिया के सामने है, जहाँ वैष्णवी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय टीम का गौरव बढ़ा रही हैं।

अंडर-19 विश्व कप से चमकी थी Vaishnavi Sharma

वैष्णवी शर्मा(Vaishnavi Sharma) के चयन के पीछे उनके शानदार आंकड़ों और दमदार प्रदर्शन की एक लंबी कहानी है। साल 2025 के फरवरी महीने में आयोजित महिला अंडर-19 विश्व कप में उन्होंने भारतीय टीम की ओर से खेलते हुए तहलका मचा दिया था। उस टूर्नामेंट में उन्होंने सर्वाधिक 17 विकेट अपने नाम किए थे, जिसमें एक जादुई हैट्रिक भी शामिल थी। इसी प्रदर्शन ने उन्हें रातों-रात चयनकर्ताओं की सबसे पसंदीदा खिलाड़ी बना दिया।

उनकी सफलता का सिलसिला यहीं नहीं थमा; इस युवा लेफ्ट आर्म स्पिनर ने सीनियर महिला टी20 स्तर पर अपनी छाप छोड़ते हुए 21 विकेट झटके और अंतर-क्षेत्रीय (Inter-Zonal) प्रतियोगिताओं में भी 12 विकेट हासिल किए। घरेलू क्रिकेट और विश्व कप में दिखाए गए इसी निरंतर प्रदर्शन का नतीजा है कि आज वह भारतीय सीनियर टीम की मुख्य स्पिनर बनकर उभरी हैं।

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