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सीमा पर बलिदान: चंपावत के अग्निवीर Deepak Singh पुंछ में शहीद, परिवार और गाँव में मातम

By Admin@2001

Published on: November 24, 2025

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चंपावत/जम्मू-कश्मीर: उत्तराखंड के चंपावत जिले के सपूत, भारतीय सेना के युवा अग्निवीर जवान (Deepak Singh) दीपक सिंह (23 वर्ष) की जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से हुई असामयिक मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया है। महज 10 दिन पहले ही छुट्टी बिताकर अपनी ड्यूटी पर लौटे इस जाँबाज सिपाही के बलिदान की खबर ने परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है, जबकि गाँव का माहौल गमगीन है।

देश सेवा का जुनून, दो साल पहले हुए थे भर्ती: पाटी ब्लॉक के खरही गाँव निवासी Deepak Singh पुत्र श्री शिवराज सिंह के हृदय में बचपन से ही देश सेवा का अटूट जज्बा था। उन्होंने अपने इसी सपने को साकार करते हुए दो साल पहले ही ‘अग्निपथ योजना’ के तहत भारतीय सेना में अपनी जगह बनाई थी। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें देश की सबसे चुनौतीपूर्ण सीमाओं में से एक, जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले की मेंढर तहसील में नियंत्रण रेखा के समीप एक अग्रिम चौकी पर तैनात किया गया था। इस युवा जवान के चयन ने उनके परिवार और पूरे गाँव को गर्व से भर दिया था।

पुंछ में हुई दर्दनाक घटना: यह हृदय विदारक घटना शनिवार, 22 नवंबर की दोपहर लगभग 2.30 बजे की बताई जा रही है। नियंत्रण रेखा पर तैनात जवानों की चौकी पर अचानक गोली चलने की आवाज से अफरा-तफरी मच गई। साथी जवान जब तेजी से मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने दीपक सिंह को खून से लथपथ पाया। बिना समय गंवाए उन्हें तुरंत बटालियन के चिकित्सा शिविर (Medical Camp) ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने गहन जाँच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु, जाँच जारी: दीपक सिंह को गोली कैसे लगी, यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है। घटना आकस्मिक थी, दुर्घटना या इसके पीछे कोई और कारण, इन सभी पहलुओं पर सेना और स्थानीय पुलिस ने विस्तृत जाँच शुरू कर दी है। अग्रिम चौकी पर हुई इस घटना के वास्तविक कारणों को जानने के लिए गहराई से छानबीन की जा रही है। देश की सेवा में तैनात एक युवा सैनिक की इस तरह की दर्दनाक और संदिग्ध मृत्यु कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है, जिसका उत्तर मिलना अभी बाकी है।

10 दिन पहले ही घर से लौटे थे ड्यूटी पर: दीपक की शहादत का दर्द इसलिए भी अधिक है क्योंकि वह कुछ ही दिन पहले अपने गाँव आए थे। ग्रामीणों ने नम आँखों से बताया कि दीपक अपनी छुट्टी के दौरान गाँव में आयोजित खरही मेले में पूरे उत्साह और जोश के साथ शामिल हुए थे। अपने परिवार, दोस्तों और ग्रामीणों से मिलकर उन्होंने कुछ खुशी के पल बिताए थे। छुट्टी पूरी करने के बाद, वह मात्र 10 दिन पहले ही अपने मोर्चे पर वापस लौटे थे, और उनकी वापसी के इतने कम समय में ही उनके बलिदान की खबर आ गई।

पूरे जिले में शोक की लहर: दीपक सिंह के शहीद होने की सूचना मिलते ही खरही गाँव सहित पूरे चंपावत जिले में शोक की लहर दौड़ गई है। परिवार में माता-पिता और अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार और ग्रामीण अब उस घड़ी का इंतजार कर रहे हैं, जब इस वीर सपूत का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गाँव पहुंचेगा। बताया जा रहा है कि शहीद दीपक सिंह का पार्थिव शरीर सोमवार तक उनके गाँव पहुंचने की संभावना है, जिसके बाद पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

“दीपक सिंह का यह बलिदान एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि देश की सीमाएं सुरक्षित रखने वाले जवान किस प्रकार हर पल खतरों और अनिश्चितताओं के बीच अपनी ड्यूटी निभाते हैं। उनका सर्वोच्च बलिदान देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। पूरा उत्तराखंड और देश इस वीर सपूत को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।”

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