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धोखे का बदला और मौत का सफर: हल्द्वानी के चर्चित नाजिम हत्याकांड में प्रेमी जोड़े को उम्रकैद

By Admin@2001

Published on: December 23, 2025

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haldwani news

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देहरादून/हल्द्वानी: देहरादून की एक स्थानीय अदालत ने चार साल पुराने चर्चित हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एक महिला और उसके प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरीश कुमार गोयल की अदालत ने सोमवार को अमरीन जहां और उसके साथी राधेश्याम शुक्ला को नाजिर अली की हत्या का दोषी करार दिया।

मामला जनवरी 2020 का है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, हल्द्वानी के बनभूलपुरा की रहने वाली 28 वर्षीय अमरीन जहां का पूर्व में नाजिम अली के साथ प्रेम प्रसंग था। नाजिम ने अमरीन से शादी का वादा किया था, लेकिन बाद में उसने किसी दूसरी महिला से निकाह कर लिया। इस धोखे ने अमरीन के मन में प्रतिशोध की भावना भर दी।

अमरीन ने अपने नए प्रेमी राधेश्याम शुक्ला (30, निवासी हल्द्वानी) के साथ मिलकर नाजिम को रास्ते से हटाने की साजिश रची। 2 जनवरी 2020 को, दोनों ने नाजिम को भीमताल घूमने के बहाने अपनी कार में बैठाया।

काठगोदाम-भीमताल मार्ग के पास एक हेयरपिन मोड़ पर, उन्होंने ‘साइटसीइंग’ (नजारे देखने) के बहाने गाड़ी रोकी। वहां राधेश्याम ने .315 बोर के तमंचे से नाजिम को गोली मार दी। हत्या के बाद राधेश्याम मौके से फरार हो गया, जबकि अमरीन ने शातिर चाल चलते हुए नाजिम के शव को कार में डाला और बृजलाल अस्पताल ले गई। वहां उसने दावा किया कि नाजिम का एक्सीडेंट हो गया है। उसने नाजिम के भाई वाजिद अली को भी फोन कर खुद को नाजिम की दोस्त बताया।

सबूतों ने खोली पोल

अस्पताल के डॉक्टरों ने जब पाया कि नाजिम की मौत दुर्घटना से नहीं बल्कि गोली लगने से हुई है, तो तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने अमरीन को अस्पताल से ही हिरासत में ले लिया।

जिला सरकारी वकील सुशील कुमार शर्मा ने अदालत में पुख्ता सबूत पेश किए:

  • मोबाइल फोटो: राधेश्याम के फोन से बरामद पांच तस्वीरें, जो घटना से कुछ देर पहले तीनों की एक साथ खींची गई थीं।
  • हथियार की बरामदगी: राधेश्याम के इकबालिया बयान पर पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल और कारतूस बरामद किए।
  • खून के निशान: राधेश्याम के कपड़ों पर मिले खून के धब्बों का मिलान नाजिम के डीएनए से हुआ, जो सबसे बड़ा सबूत साबित हुआ।

सजा सुनाते समय न्यायाधीश हरीश कुमार गोयल ने धार्मिक ग्रंथों का संदर्भ देते हुए अपराध की गंभीरता पर जोर दिया। कोर्ट ने कुरान की आयत का जिक्र करते हुए कहा कि “जो व्यक्ति किसी निर्दोष की हत्या करता है, माना जाता है कि उसने पूरी मानवता की हत्या की है।”

इसके साथ ही कोर्ट ने मनुस्मृति को उद्धृत करते हुए कहा कि “जो व्यक्ति स्वार्थ के लिए किसी निर्दोष की जान लेता है, उसे जीवन में कभी सुख या शांति प्राप्त नहीं होती।”

यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश देता है कि व्यक्तिगत रंजिश या प्रतिशोध के नाम पर कानून हाथ में लेने वालों का अंत सलाखों के पीछे ही होता है। अभियोजन पक्ष ने कुल 17 गवाहों को पेश कर कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और लोकेशन के आधार पर आरोपियों के जुर्म को साबित किया।

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