बागेश्वर/गरुड़: उत्तराखंड में भ्रष्टाचार (Corruption) के खिलाफ जारी अभियान के तहत, बागेश्वर जिले की तहसील गरुड़ (Garur) में तैनात एक पटवारी को विजिलेंस टीम (Vigilance Team) ने ₹5000 की रिश्वत (bribe) लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। पटवारी की गिरफ्तारी के बाद पूरे बागेश्वर प्रशासन और राजस्व विभाग (Revenue Department) में हड़कंप मच गया है।
शिकायतकर्ता की पैमाइश का था मामला
विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई स्यालीस्टेट निवासी एक युवक मनोज सिंह की शिकायत पर की गई। मनोज सिंह ने विजिलेंस कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया था कि स्थानीय पटवारी, प्रवीण सिंह टाकुली, उनकी जमीन की पैमाइश (measurement) करने के एवज में उनसे रिश्वत की मांग कर रहे हैं।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए, विजिलेंस ने तुरंत इसकी प्राथमिक जाँच (preliminary inquiry) की। शिकायत सही पाए जाने के बाद, विजिलेंस टीम ने पटवारी को पकड़ने के लिए एक ट्रैप टीम (Trap Team) का गठन किया।
रंगे हाथों गिरफ्तारी
सोमवार को, विजिलेंस टीम ने पटवारी प्रवीण सिंह टाकुली को ₹5000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों (red-handed) गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पटवारी को हिरासत में ले लिया गया है और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
जिलाधिकारी (DM) ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए सख्त कार्रवाई (strict action) के निर्देश दिए हैं और राजस्व विभाग के अधिकारियों को पारदर्शिता (transparency) सुनिश्चित करने के लिए कहा है।
सरकारी अधिकारी क्यों लेते हैं रिश्वत? (Why Govt. Officials Take Bribery?)
यह घटना एक गंभीर सवाल खड़ा करती है: जब सरकारी अधिकारियों को बड़ा वेतन (huge salary) मिलता है और सार्वजनिक सेवा (public service) करना उनकी नौकरी का अनिवार्य हिस्सा है, तो वे रिश्वत क्यों लेते हैं? इसके पीछे कई जटिल कारण हैं:
1. नैतिक पतन और लालच (Ethical Decline and Greed)
- कई अधिकारियों में नैतिक मूल्यों (ethical values) का अभाव होता है। उनकी आय (income) पर्याप्त होने के बावजूद, अत्यधिक लालच (excessive greed) उन्हें अवैध रूप से धन कमाने के लिए प्रेरित करता है।
- समाज में बढ़ता उपभोक्तावाद (consumerism) और दिखावे की जीवनशैली (ostentatious lifestyle) भी कई बार अधिकारियों को उनकी आय से अधिक खर्च करने के लिए मजबूर करती है, जिसके लिए वे रिश्वत का सहारा लेते हैं।
2. कार्यप्रणाली में एकाधिकार (Monopoly in Functioning)
- राजस्व विभाग (Revenue Department) जैसे विभागों में पटवारियों के पास जमीन से जुड़े कार्यों जैसे पैमाइश, दाखिल-खारिज आदि में एकाधिकार (monopoly) होता है।
- जब किसी सेवा के लिए कोई वैकल्पिक सुविधा (alternative facility) नहीं होती, तो अधिकारी अपनी स्थिति का दुरुपयोग (misuse) करते हैं और जानबूझकर काम में देरी करते हैं ताकि नागरिक ‘सुविधा शुल्क’ देने के लिए मजबूर हो जाएँ।
3. दण्ड का डर कम होना (Lack of Fear of Punishment)
- भ्रष्टाचार के मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया (long legal process) और कम सजा दर (low conviction rate) के कारण अधिकारियों में दण्ड का डर कम होता है। उन्हें लगता है कि वे आसानी से बच निकलेंगे या विभागीय जाँच में मामला दब जाएगा।
- अक्सर राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव (political and administrative influence) का उपयोग करके भी अधिकारी अपनी सजा कम करा लेते हैं।
सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए? (Action Required by the Government)
भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए सरकार को बहु-आयामी दृष्टिकोण (multi-dimensional approach) अपनाना चाहिए:
- सख्त दण्ड और त्वरित कार्यवाही: भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित जाँच (quick investigation) सुनिश्चित की जानी चाहिए और दोषी अधिकारियों को बिना किसी देरी के कठोर दण्ड (severe punishment) मिलना चाहिए।
- पारदर्शिता और डिजिटलीकरण: राजस्व विभाग के कार्यों को पूरी तरह से डिजिटाइज़ (digitize) किया जाना चाहिए, जिससे नागरिकों और अधिकारियों के बीच संपर्क कम हो और रिश्वतखोरी की संभावना समाप्त हो।
- नैतिक प्रशिक्षण: सरकारी कर्मचारियों के लिए नैतिकता और लोक सेवा (Ethics and Public Service) पर नियमित प्रशिक्षण (regular training) अनिवार्य किया जाना चाहिए।
- शिकायत निवारण तंत्र: शिकायत दर्ज करने और निवारण (redressal) के तंत्र को सरल और सुरक्षित बनाया जाना चाहिए, ताकि शिकायतकर्ता बिना किसी डर के आगे आ सकें।
“यह गिरफ्तारी बागेश्वर प्रशासन के लिए एक वेक-अप कॉल है कि भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति लागू की जाए।”
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