पिथौरागढ़/देहरादून: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है। जिले के ओगला गाँव (Ogla Village) के निवासी दीपक सिंह जिमिवाल जो मर्चेंट नेवी (Merchant Navy) में कार्यरत हैं, उन्हें इटली (Italy) में गिरफ्तार कर लिया गया है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि गिरफ्तारी के 27 दिन बीत जाने के बावजूद, उनके परिजन यह नहीं जान पाए हैं कि दीपक पर क्या आरोप हैं और उन्हें किस कारण से गिरफ्तार किया गया है।
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अचानक आया एक कॉल, फिर चुप्पी
दीपक सिंह जिमिवाल के परिवार को 2 नवंबर को उनके मोबाइल नंबर से एक कॉल आया था। इस कॉल में केवल इतना बताया गया कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है और अब इस नंबर पर आगे बात नहीं हो पाएगी। इस कॉल के बाद से परिवार दीपक से किसी भी तरह का संपर्क स्थापित नहीं कर पाया है, जिससे उनकी चिंताएँ कई गुना बढ़ गई हैं।
- पिता: दीपक के पिता, पुष्कर सिंह जिमिवाल, असम राइफल्स (Assam Rifles) में तैनात हैं और वर्तमान में नॉर्थ-ईस्ट (North-East) में ड्यूटी पर हैं।
- घर पर: घर पर दीपक की माँ और भाई सदमे में हैं और समझ नहीं पा रहे हैं कि यह सब अचानक कैसे हो गया।
- नवविवाहित: दीपक की शादी सिर्फ छह महीने पहले ही हुई थी।
कंपनी की मदद भी नाकाफी (Insufficient Help from the Company)
दीपक जिस मर्चेंट नेवी कंपनी में काम करते थे, उन्होंने शुरुआती तौर पर उनकी कानूनी मदद (legal assistance) के लिए एक वकील (lawyer) नियुक्त किया है। हालांकि, परिजनों के अनुसार, भाषा की समस्या (language barrier) के कारण इटली में सही तरीके से पैरवी (advocacy) नहीं हो पा रही है।
27 नवंबर को कंपनी से परिवार को एक और कॉल आया, लेकिन जब परिवार ने उनसे गिरफ्तारी का कारण (reason for arrest) पूछा, तो उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। कंपनी ने परिवार को सलाह दी है कि वे इटली में दूसरा वकील कर लें, लेकिन दूर बैठे परिजन कानूनी प्रक्रिया की जटिलता और अनिश्चितता को लेकर असमंजस में हैं।
परिजनों का दर्द: “हमें पता ही नहीं चल रहा कि दीपक पर क्या आरोप हैं। किससे बात करें, किसके माध्यम से मदद लें, कोई ठोस जानकारी नहीं मिल रही है। 27 दिन हो गए, और हर गुजरते दिन के साथ हमारी चिंता बढ़ती जा रही है।”
अंतर्राष्ट्रीय मामला: मदद की गुहार
दीपक सिंह जिमिवाल का मामला अब अंतर्राष्ट्रीय कानूनी और राजनयिक (International Legal and Diplomatic) पहलू वाला बन गया है। इस समय परिवार को न केवल त्वरित कानूनी सहायता की, बल्कि विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs – MEA) और स्थानीय प्रशासन (Local Administration) की हस्तक्षेप की भी सख्त ज़रूरत है।
किसी भी तरफ से ठोस जानकारी न मिलने की वजह से परिजन अब राज्य सरकार और केंद्र सरकार के उच्च अधिकारियों से मदद की गुहार लगा रहे हैं ताकि वे कम से कम यह जान सकें कि दीपक किस हाल में हैं और उनके खिलाफ क्या आरोप लगाए गए हैं।
इस अनिश्चितता और सदमे की स्थिति में, पिथौरागढ़ का यह परिवार अब भारत सरकार और दूतावास (Embassy) की त्वरित कार्रवाई का इंतजार कर रहा है ताकि उनके बेटे की सुरक्षित वापसी की राह आसान हो सके।
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