देहरादून (Dehradun): उत्तराखंड में शिक्षकों के वेतन (Salary) और विभागीय विसंगतियों (departmental irregularities) से जुड़ी समस्याएँ लगातार गंभीर बनी हुई हैं। शिक्षकों को महीनों से वेतन न मिलने की शिकायतें सामने आई हैं, जिसके कारण अब उन्होंने राज्य सरकार को आंदोलन की चेतावनी (warning of protest) दी है।
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वेतन विलंब और विसंगतियाँ: प्रमुख कारण
प्राप्त नवीनतम जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड के शिक्षा विभाग (Education Department) में वेतन संकट कई स्तरों पर देखा जा रहा है:
- BRP/CRP का तीन महीने का वेतन अटका: आउटसोर्सिंग एजेंसी (Outsourcing Agency) के माध्यम से सितंबर में शिक्षा विभाग में नियुक्त किए गए BRP (Block Resource Person) और CRP (Cluster Resource Person) के 580 से अधिक कर्मचारियों को तीन महीने बीत जाने के बाद भी वेतन नहीं मिला है।
- विलंब का कारण: विभाग का कहना है कि एमओयू (MOU) के अनुसार, पहले आउटसोर्सिंग कंपनी (Outsourcing Company) को भुगतान करना है, जिसके बाद कंपनी विभाग से भुगतान की मांग करेगी। निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने कंपनी को वेतन जारी करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर भुगतान अभी भी रुका हुआ है।
- अशासकीय स्कूलों में दो माह से वेतन नहीं: राज्य सहायता प्राप्त (State-Aided) जूनियर और प्राथमिक स्कूलों के हजारों शिक्षक और कर्मचारियों को भी हाल ही में दो महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण भारी आर्थिक संकट (economic crisis) से जूझना पड़ा।
- वेतन विसंगति (Salary Discrepancy) का मुद्दा: कई जिलों में शिक्षकों को वेतन विसंगति का भी सामना करना पड़ रहा है, जहाँ वरिष्ठ शिक्षकों का वेतन कनिष्ठ शिक्षकों से कम है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
- कोर्ट की फटकार: शिक्षकों के वेतन में देरी के मामले में उत्तराखंड हाई कोर्ट (High Court) पहले भी सख्त टिप्पणी कर चुका है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि शिक्षकों का भी पेट होता है और उन्हें भी भोजन की आवश्यकता होती है।
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शिक्षकों में गहरा रोष, आंदोलन की तैयारी
वेतन और वेतनवृद्धि (increment) जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे शिक्षकों ने अब विभागीय लचर कार्यप्रणाली (poor functioning) पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।
उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ सहित विभिन्न शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि शासन-प्रशासन जल्द इस समस्या का समाधान नहीं करता है और शिक्षकों का लंबित वेतन तुरंत जारी नहीं किया जाता है, तो वे व्यापक स्तर पर आंदोलन (agitation) की रणनीति अपनाने के लिए बाध्य होंगे।
शिक्षकों और कर्मचारियों का यह संघर्ष दर्शाता है कि उन्हें नियमित वेतन और वेतन वृद्धि जैसी अपनी मूलभूत मांगों के लिए भी लगातार प्रशासन से जूझना पड़ रहा है, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
चूँकि उपनल कर्मचारियों के लिए कल ही मंत्री के साथ सहमति बनी है, अब अगला कदम यह देखना होगा कि शिक्षकों के वेतन संकट को लेकर सरकार क्या तत्काल कदम उठाती है।
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